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Showing posts from December, 2019

Emblem of Iran and Sikh Khanda

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ईरानी प्रतीक चिह्न और सिखों के खंडे में क्या है अंतर पहली नजर में देखने पर सिखों के धार्मिक झंडे निशान साहिब में बने खंडे के प्रतीक चिह्न और इरान के झंडे में बने निशान-ए-मिली के प्रतीक चिह्न में काफी सम्मानता नजर आती हैं परन्तु इनमें कुछ मूलभूत अन्तर हैं जैसे कि :   Colour : खंडे के प्रतीक चिह्न का आधिकारिक रंग नीला है वहीं ईरानी प्रतीक चिह्न लाल रंग में नज़र आता है। Established Year : खंडे के वर्तमान प्रतीक चिह्न को सिखों के धार्मिक झंडे में अनुमानतन 1920 से 1930 के दरमियान, शामिल किया गया था। वहीं निशान-ए-मिली के प्रतीक चिह्न को ईरान के झंडे में 1980 की ईरानी क्रांति के बाद शामिल किया गया था। Exact Date : इस ईरानी प्रतीक चिह्न को हामिद नादिमी ने डिज़ाइन किया था और इसे आधिकारिक तौर पर 9 मई 1980 को ईरान के पहले सर्वोच्च धार्मिक नेता अयातुल्ला खुमैनी जी ने मंजूरी के बाद ईरानी झंडे में शामिल किया गया। वहीं सिखों के झंडे का यह वर्तमान प्रतीक चिह्न विगत वर्षो के कई सुधारों का स्वरूप चिह्न है इसलिए इसके निर्माणकार और निर्माण की तिथि के बारे में सटीक जानकारी दे पाना बहुत जटिल बात है, ...

फौजी की आत्मा देती है सरहद पर पहरा

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      मृत्यु के पश्चात भी फौजी की आत्मा आन ड्यूटी जी हाँ आप जी ने सही पढ़ा एक फौजी के शहीद होने के बावजूद भी उसकी आत्मा कर रही है सिक्किम में भारत चीन बाॅडर पर अपनी ड्यूटी यह आत्मा ना सिर्फ सरहद पर पहरा देती है बल्कि दुश्मन की हर गतिविधि की खबर पहले हि सांकेतिक रूप में भारतीय सैना को पहुंचा देती है इतना हि नही सरहद पर भटके हुए नए भारतीय सैनिकों को रास्ता दिखाना हो या फिर ड्यूटी पर सौ रहे जवानों को थप्पड़ मार कर जगाना हो यह सब काम करती है 23 वें पंजाब रेजिमेंट के जवान सरदार हरभजन सिंह जी की पवित्र आत्मा। सैना एवं देश के प्रति उनकी निष्ठा भावना को देखते हुए भारतीय सैना ने उन्हें बाबा जी की पदवी दी है और सिक्किम में 14000 हजार फुट की ऊँचाई पर जेलेप ला और नाथू ला दर्रे के बीच उनके एक मंदिर का भी निर्माण किया है। यहां उनकी वर्दी बिस्तर फोटो एंव जूते रखे हुए है सैनिकों का मानना है कि हर रोज उनके बिस्तर पर सिलवटें तथा जूतों के नीचे मिट्टी लगी होती है जैसे कोई फौजी ड्यूटी करके आया हो। बाबा हरभजन सिंह जी का जन्म 30 अगस्त 1946 को गुजरांवाला (पाकिस्तान) में हुआ बँटवारे क...

बुरे लोगों के साथ बुरा क्यों नहीं होता

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       बुरे लोगों के साथ बुरा क्यों नहीं होता   एक साधक ने एक यश प्रश्न किसी आचार्य के आगे रख दिया कि है आचार्य बुरे लोगों के साथ बुरा क्यों नहीं होता उन्हें उनके बुरे कर्मों की सजा क्यों नहीं मिलती अपितु अच्छे लोगों के साथ ही सदैव बुरा क्यों होता है। आचार्य दो मिनट मौन रहने के पश्चात बोले वत्स तुम्हारे प्रश्न का उत्तर है "परालब्ध"  साधक ने फिर पूछा आचार्य यह परालब्ध क्या है ?  आचार्य हमारी आयु निश्चित है कर्म नहीं हमारे पुर्वले जन्म में किए गए अच्छे एवं बुरे कर्मो का वह फल जो हम उस जन्म में नहीं भोग सके उसी से विधाता हमारी परालब्ध का निर्माण करते है।  तुम्हारा प्रश्न था कि बुरे लोगों के साथ बुरा क्यों नहीं होता उन्हें उनके बुरे कर्मों की सजा क्यों नहीं मिलती इसके लिए तुम गेहूँ एकत्र करने वाले एक बड़े ड्रम का उदाहरण लो जो गेहूँ से ऊपर तक भरा होता है और उसके नीचे सामने की तरफ एक छोटा छेद होता है जिस पर ढक्कन लगा होता है भोग के लिए जितनी गेहूँ कि आवश्यकता होती है उसे उस छोटे छेद से बाहर निकाल लिया जाता है। वत्स बुरा व्यक्ति जो बुरे क...