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Showing posts from July, 2021

ਅੰਤਿ ਕਾਲਿ ਜੋ ਲਛਮੀ ਸਿਮਰੈ Ant kaal jo lakshmi simrey अंति कालि जो लछमी सिमरै

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  भगत त्रिलोचन जी ने गुरू ग्रंथ साहिब में मनुष्य की अंतिम अवस्था के समय बनने वाली स्मृति के अनुसार उसे अगली कौन सी योनि मिलेगी इसका का जिक्र बड़े ही सुंदर ढंग से अंग (पेज) संख्या 526 पर किया है। जिसका संक्षिप्त विवरण इस प्रकार से है। ਭਗਤ ਤ੍ਰਿਲੋਚਨ ਜੀ ਜਨਮ: 1267 ਮਹਾਰਾਸ਼ਟਰ ਧਰਮ ਪਤਨੀ : ਅਨੰਤਾ ਦੇਵੀ ਅਕਾਲ ਚਲਾਣਾ : 1335 ਗੁਰੂ ਗ੍ਰੰਥ ਸਾਹਿਬ ਜੀ ਵਿਚ 4 ਸ਼ਬਦ ਰਾਗ ਸ੍ਰੀ : ਇਕ ਸ਼ਬਦ ਰਾਗ ਧਨਾਸਰੀ : ਇਕ ਸ਼ਬਦ ਰਾਗ ਗੁਜਰੀ : ਦੋ ਸ਼ਬਦ Video link  Click here  ↔  https://youtu.be/siO1-6XvjKY ਰਾਗ ਗੂਜਰੀ            राग गुजरी            Raag Goojaree ਅੰਤਿ  ਕਾਲਿ  ਜੋ  ਲਛਮੀ  ਸਿਮਰੈ  ਐਸੀ  ਚਿੰਤਾ  ਮਹਿ  ਜੇ  ਮਰੈ  ॥ ਸਰਪ  ਜੋਨਿ  ਵਲਿ  ਵਲਿ  ਅਉਤਰੈ  ॥੧॥ अंति कालि जो लछमी सिमरै ऐसी चिंता महि जे मरै ॥ सरप जोनि वलि वलि अउतरै   ॥१॥ Ant kaal jo lachhmee simrai, aisee chintaa mehi je marai. sarap jon val val autarai.   ॥1॥ Meaning:  At the very last moment, one who thinks of wealth, an...

अजामिल की कथा

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                        अजामल की कथा गौड़ सम्प्रदाय के ब्राह्मणों का एक अग्रहार कन्नोज में स्थित था। कन्नोज शब्द की उत्पत्ति वास्तव में संस्कृत भाषा के शब्द कान्यकुब्ज से हुई है। इसी कारण से कन्नोज के इन  ब्राह्मणों को इतिहास में कान्यकुब्ज ब्राह्मणों की संज्ञा दी गई है। अग्रहार से आश्य ऐसी जगह से हैं यहां केवल ब्राह्मण रहते हों कान्यकुब्ज ब्राह्मणों के अग्रहार में अजामल नाम का एक नवयुवक ब्रह्मण अपने वृद्ध माता पिता के साथ रहता था। वह  बड़ा ही सदाचारी पितृ भगत शास्त्रज्ञाता  मंत्रवेत्ता  और शीलवान था। इसके साथ साथ वह बहुत ही नेक स्वभाव का था। वृद्ध माता पिता के साथ साथ उसे अग्रहार के अन्य वृद्ध ब्राह्मणों की सेवा करने में भी बहुत आनंद आता था। इसी कारण से वह अग्रहार का एक लोकप्रिय चेहरा बन गया था। एक दिन जब पिता जी ने उसे पूजा अर्चना के लिए वन से फल-फूल, समिधा व कुश लाने को भेजा तो संयोग वश इसने किसी  पुरूष और महिला को नदी किनारे सम्बन्ध बनाते देख लिया। जिस का इस के मन पर गहरा प्रभाव पड़ा घर पहुंच क...

Mahakaleshwar Jyotirlinga kaise jaye

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                   श्री ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग कैसे पहुंचे नमस्कार साथियों अपने इस लेख के माध्यम से में आप जी को अपनी ओंकारेश्वर तथा महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग दर्शन यात्रा का सम्पूर्ण विवरण बताने जा रहा हूँ जो कि इस प्रकार से है।  ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग की दर्शन यात्रा पर जाने के लिए आप जी को अपने शहर से सड़क या रेल मार्ग से खंडवा या इंदौर जाना होगा खंडवा रेलवे स्टेशन से ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग की दूरी 70 किलोमीटर है और इंदौर रेलवे स्टेशन से ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग की दूरी 79 किलोमीटर है। वहीं इंदौर रेलवे स्टेशन से उज्जैन रेलवे स्टेशन की दूरी मात्र 56 किलोमीटर पड़ती है।  इंदौर शहर ओंकारेश्वर तथा उज्जैन के में मध्य पड़ता है। इसलिए अधिकांश दर्शन यात्री इंदौर रेलवे स्टेशन जाना ही उचित समझते हैं। वैसे आप महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग (महाकाल) के दर्शनों के लिए सड़क या रेल मार्ग से सीधे उज्जैन भी जा सकते हैं। मैंने अपनी दर्शन यात्रा की शुरूआत नई दिल्ली रेलवे स्टेशन दिनांक 14-07-2021 को कि इसके लिए मैंने रेल गाड़ी की आने जाने की टिकट और दर्श...

Baijnath dham himachal pardesh kaise jaye

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                   बैजनाथ धाम हिमाचल कैसे पहुंचे नमस्कार साथियों अपने इस लेख के माध्यम से में आप जी को अपनी बैजनाथ धाम की दर्शन यात्रा का सम्पूर्ण विवरण बताने जा रहा हूँ जो कि इस प्रकार से है। बैजनाथ धाम हिमाचल प्रदेश  के दर्शनों पर जाने के लिए सर्वप्रथम आप जी को अपने शहर से सड़क या रेल मार्ग से  हिमाचल प्रदेश में बैजनाथ पपरो ला  पहुंचना होगा। वहां से मंदिर बहुत नजदीक है । मैंने अपनी दर्शन यात्रा की शुरुआत  पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन  से की जिसके लिए मैंने 17-06-2021 को ही दिल्ली से पठानकोट आने जाने की 01-07-2021 की रेल टिकट बुक करवा ली थी। हिमाचल प्रदेश की वेबसाईट से ई पास भी बनवा लिया था। हिमाचल सरकार ने टूरिस्टों के लिए तो हिमाचल में टूरिस्ट प्लेस खोल दिए थे पर धार्मिक स्थलों को अभी श्रद्धालुओं के लिए नहीं खोला था मुझे डर था कि शायद मुझे कहीं टिकट कैंसल ना करवानी पड़ जाएँ तभी खबर आई कि हिमाचल सरकार 01-07-2021 से प्रदेश के सभी मंदिरों को खोलने जा रही है और श्रद्धालुओं को ई पास के बिना ही यात्रा करने की अनुमति होग...