सकारात्मक सोच का महत्व
सकारात्मक सोच का महत्व एक व्यक्ति ऑटो में बैठकर रेलवे स्टेशन जा रहा था। ऑटो वाला बड़े आराम से ऑटो चला रहा था। कि अचानक एक कार पार्किंग से निकलकर रोड पर आ गई। ऑटो ड्राइवर ने तेजी से ब्रेक लगाया और कार, ऑटो से टकराते-टकराते बची। कार चला रहा आदमी गुस्से में ऑटोवाले को ही भला-बुरा कहने लगा उसे गालियां बकने लगा जबकि गलती कार वाले की ही थी ऑटो चालक एक सत्संगी (सकारात्मक विचार सुनने-सुनाने वाला) था। उसने कार वाले की बातों पर बिल्कुल भी गुस्सा नहीं किया और क्षमा माँगते हुए आगे बढ़ गया। ऑटो में बैठे व्यक्ति को कार वाले की बातों पर बहुत गुस्सा आ रहा था और उसने ऑटो वाले से पूछा तुमने उस कार वाले को बिना कुछ कहे ऐसे ही क्यों जाने दिया। उसने तुम्हें भला-बुरा भी कहा जबकि गलती तो उसी की थी। इस पर ऑटो वाले ने कहा हमारी किस्मत अच्छी है साहब जो हम बच गए वरना अगर एक्सीडेंट हो जाता तो हमें अभी उसकी वजह अस्पताल भी जाना पड़ सकता था परमात्मा का शुक्र है जो सस्ते में ही बला टल गई। रही बात उसकी घटिया बातों कि तो साहब बहुत से लोग गार्बेज ट्रक (कूड़े का ट्रक) की त...