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Showing posts from June, 2019

ऊपर वाले की लाठी में आवाज नहीं होती

     ऊपर वाले की लाठी में आवाज नहीं होती  एक शख्स बहुत हि सम्पन्न परिवार से तालुक रखता था समाज में उनके परिवार का काफी रूतबा और नाम था। पर वह शख्स बहुत ही मनमौजी स्वभाव का था उसे अपने पुरखो के द्वारा कमाई इज्जत की भी कुछ खास परवाह नहीं थी स्वार्थी प्रवृत्ति होने के कारण वह सदैव अपना ही फायदा सोचता था दूसरों के दर्द पीड़ा की उसे कोई परवाह नहीं थी उसे अपनी धन दौलत पर भी काफी घमंड था  वह लोगों को नीचा दिखाने में भी कोई कसर नहीं छोड़ता था लोग अपनी बेबसी के कारण चुप रह जाते थे। एक बार वह सुबह की सैर करके घर लोट रहा था तो रास्ते में उसे एक ब्लाइंड व्यक्ति आते हुए दिखा जैसे ही वह इसके पास आया इस शख्स ने पैर आगे कर दिया और वह व्यक्ति अड़ंगी खा कर गिर गया उसका बाजू जोर से जमीन पर जा कर लगा पर वह ब्लाइंड व्यक्ति कुछ नहीं बोला और चुपचाप खड़ा होकर आगे बढ़ गया मनमौजी भी मुस्कराते हुए आगे बढ़ गया जैसे कोई महान काम किया हो। समय बीता इसके घर औलाद पैदा हुई डाक्टर साहिब ने इसे बुलाया और समझाया कि आपका बेबी नार्मल नहीं है वह ब्लाइंड है यह शख्स थोड़ा सकपका सा गया डॉक्टर साहब ने दि...

विद्वान पंडित जी और भोले लोग

                  विद्वान पंडित जी और भोले लोग  गांव के मंदिर में सीधे साधे गांव वासी और वृद्ध पंडित जी बड़ी ही श्रद्धा भाव से सुबह और शाम भगवान श्री हरि विष्णु जी की आरती किया करते थे। मंदिर में भगतो के आरती गायन एंव घंटियो की मधुर ध्वनि से मानो लगता था कि स्वयं हरि विष्णु वहां नित्य प्रति आरती सुनने आते हो। मंदिर की रौनक देखते ही बनती थी।                    पंडित जी को शास्त्रों का ज्ञान तो सीमित था पर उनका स्वभाव बहुत सरल था। इसलिए सब लोग उनका सम्मान करते थे।                      एक दिन अचानक पंडित जी की मृत्यु से सभी गांव वासियो को गहरा धक्का लगा। फिर कुछ दिनों बाद गांव के मंदिर में नए पंडित जी को रखने पर विचार हुआ तो एक योग्य विद्वान पंडित जी को गांव के मंदिर में रखा गया नए पंडित जी सभी शास्त्रों में निपुण थे तथा बहुत ही आध्यात्मिक व प्रेरणाप्रद व्यक्ति थे परंतु उनका स्वभाव बहुत कठोर था।           ...