ऊपर वाले की लाठी में आवाज नहीं होती
ऊपर वाले की लाठी में आवाज नहीं होती
एक शख्स बहुत हि सम्पन्न परिवार से तालुक रखता था समाज में उनके परिवार का काफी रूतबा और नाम था। पर वह शख्स बहुत ही मनमौजी स्वभाव का था उसे अपने पुरखो के द्वारा कमाई इज्जत की भी कुछ खास परवाह नहीं थी स्वार्थी प्रवृत्ति होने के कारण वह सदैव अपना ही फायदा सोचता था दूसरों के दर्द पीड़ा की उसे कोई परवाह नहीं थी उसे अपनी धन दौलत पर भी काफी घमंड था वह लोगों को नीचा दिखाने में भी कोई कसर नहीं छोड़ता था लोग अपनी बेबसी के कारण चुप रह जाते थे।
एक बार वह सुबह की सैर करके घर लोट रहा था तो रास्ते में उसे एक ब्लाइंड व्यक्ति आते हुए दिखा जैसे ही वह इसके पास आया इस शख्स ने पैर आगे कर दिया और वह व्यक्ति अड़ंगी खा कर गिर गया उसका बाजू जोर से जमीन पर जा कर लगा पर वह ब्लाइंड व्यक्ति कुछ नहीं बोला और चुपचाप खड़ा होकर आगे बढ़ गया मनमौजी भी मुस्कराते हुए आगे बढ़ गया जैसे कोई महान काम किया हो।
समय बीता इसके घर औलाद पैदा हुई डाक्टर साहिब ने इसे बुलाया और समझाया कि आपका बेबी नार्मल नहीं है वह ब्लाइंड है यह शख्स थोड़ा सकपका सा गया डॉक्टर साहब ने दिलासा देते हुए समझाया उसका एक पैर और एक हाथ भी विकृत है उस शख्स को अपने गुनाहो का एहसास पूरी तरह से हो गया था वह समझ गया था ऊपर वाले की लाठी में आवाज नहीं होती।
पापी करम कमावदे करदे हाए हाइ
नानक जिउ मथनि माधाणीआ तिउ मथे ध्रम राइ
(गुरू ग्रंथ साहिब जी अंग संख्या 1425)
एक बार वह सुबह की सैर करके घर लोट रहा था तो रास्ते में उसे एक ब्लाइंड व्यक्ति आते हुए दिखा जैसे ही वह इसके पास आया इस शख्स ने पैर आगे कर दिया और वह व्यक्ति अड़ंगी खा कर गिर गया उसका बाजू जोर से जमीन पर जा कर लगा पर वह ब्लाइंड व्यक्ति कुछ नहीं बोला और चुपचाप खड़ा होकर आगे बढ़ गया मनमौजी भी मुस्कराते हुए आगे बढ़ गया जैसे कोई महान काम किया हो।
समय बीता इसके घर औलाद पैदा हुई डाक्टर साहिब ने इसे बुलाया और समझाया कि आपका बेबी नार्मल नहीं है वह ब्लाइंड है यह शख्स थोड़ा सकपका सा गया डॉक्टर साहब ने दिलासा देते हुए समझाया उसका एक पैर और एक हाथ भी विकृत है उस शख्स को अपने गुनाहो का एहसास पूरी तरह से हो गया था वह समझ गया था ऊपर वाले की लाठी में आवाज नहीं होती।
पापी करम कमावदे करदे हाए हाइ
नानक जिउ मथनि माधाणीआ तिउ मथे ध्रम राइ
(गुरू ग्रंथ साहिब जी अंग संख्या 1425)
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