कुत्ते को दरवेश क्यों कहते हैं

कुत्ते को दरवेश क्यों कहते है
एक समय की बात है प्राचीन काल में एक ऋषि अपने शिष्यों को अपनी विद्या सिखलाने में नाकाम रहे क्योंकि शिष्यों कि रूचि विद्या में कम शरारतों में ज्यादा थी।
समय बीतता गया और ऋषि का अन्तिम समय आ गया ऋषि को इसका पूर्वाभास हो गया उन्होंने सब शिष्यों पास बुलाया और कहा मूर्खों तुमने जीवन भर मुझसे कुछ नहीं सीखा अब ऐसा करना मेरी मृत्यु के बाद तुम मेरे शरीर को भुन कर खा लेना में अपनी सारी शक्तियाँ इसी में छोड़ जाऊंगा ऐसा करने से वह तुम्हें प्राप्त हो जांएगी।
शिष्यों ने गुरु की मृत्यु के बाद काफी मन मारकर उन्हें भून तो लिया पर अब उन्हें खाए कौन ? पहले तुम पहले तुम के चक्कर में वह उन्हें वहीं छोड़कर भाग गए।
थोड़ी देर बाद वहां से एक चंडाल गुजरा उसने भूख के कारण कुछ हिस्सा खा लिया जिससे वह और शक्तिशाली हो गया इस से ही आगे चलकर राक्षस कुल का जन्म हुआ था जो अधिक शक्ति की चाह में ऋषियों का ही भक्षण करने लगे थे।
ऋषि के बाकी बच्चे हुए मास को एक भेड़िया खा गया जिससे उसमें भी कुछ शक्तियां आ गई और आगे चलकर उससे श्वान नस्ल का जन्म हुआ जो मनुष्यों की वफादार थी।
इसे भूत प्रेत दिखाई देते थे।
कोई जख्म जो ठीक ना हो रहा हो उस पर दहीं डालकर कुत्ते से चटवाने से वह सही हो जाता था।
कुत्तों को जमदूतों के आने की खबर हो जाती है।
इन्ही गुणों के कारण उसे दरवेश भी कहा जाता है।

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