ਅੰਤਿ ਕਾਲਿ ਜੋ ਲਛਮੀ ਸਿਮਰੈ Ant kaal jo lakshmi simrey अंति कालि जो लछमी सिमरै
भगत त्रिलोचन जी ने गुरू ग्रंथ साहिब में मनुष्य की अंतिम अवस्था के समय बनने वाली स्मृति के अनुसार उसे अगली कौन सी योनि मिलेगी इसका का जिक्र बड़े ही सुंदर ढंग से अंग (पेज) संख्या 526 पर किया है। जिसका संक्षिप्त विवरण इस प्रकार से है।
ਭਗਤ ਤ੍ਰਿਲੋਚਨ ਜੀ ਜਨਮ: 1267 ਮਹਾਰਾਸ਼ਟਰ
ਧਰਮ ਪਤਨੀ : ਅਨੰਤਾ ਦੇਵੀ ਅਕਾਲ ਚਲਾਣਾ : 1335
ਗੁਰੂ ਗ੍ਰੰਥ ਸਾਹਿਬ ਜੀ ਵਿਚ 4 ਸ਼ਬਦ ਰਾਗ ਸ੍ਰੀ : ਇਕ ਸ਼ਬਦ
ਰਾਗ ਧਨਾਸਰੀ : ਇਕ ਸ਼ਬਦ ਰਾਗ ਗੁਜਰੀ : ਦੋ ਸ਼ਬਦ
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ਰਾਗ ਗੂਜਰੀ राग गुजरी Raag Goojaree
shall be reincarnated over and over again, in the form of snakes.
पद्अर्थ: अंति कालि = अंत के समय, मरने के वक्त। लछमी = माया, धन। सिमरै = याद रखता है। वलि वलि = बार बार। अउतरै = पैदा होता है।1।
अर्थ: मनुष्य को मरने के वक्त यदि धन-पदार्थ या अपने पैसे आदि की याद आए। और वह इन्हीं की याद में मर जाए तो उसकी अगली योनि साँप की होगी।
पद्अर्थ: अरी बाई = हे बहन! मति = मत कहीं, ना। रहाउ।
अर्थ: हे बहन! (मेरे लिए अरदास कर) मुझे कभी परमात्मा का नाम ना भूले (ता कि अंत समय भी वही परमात्मा याद आए)। रहाउ।
ਅੰਤਿ ਕਾਲਿ ਜੋ ਇਸਤ੍ਰੀ ਸਿਮਰੈ ਐਸੀ ਚਿੰਤਾ ਮਹਿ ਜੇ ਮਰੈ ॥
ਬੇਸਵਾ ਜੋਨਿ ਵਲਿ ਵਲਿ ਅਉਤਰੈ ॥੨॥
besvaa jon val val autarai. ॥2॥
shall be reincarnated over and over again as a prostitute.
ਅੰਤਿ ਕਾਲਿ ਜੋ ਲੜਿਕੇ ਸਿਮਰੈ ਐਸੀ ਚਿੰਤਾ ਮਹਿ ਜੇ ਮਰੈ ॥
ਸੂਕਰ ਜੋਨਿ ਵਲਿ ਵਲਿ ਅਉਤਰੈ ॥੩॥
sookar jon val val autarai. ॥3॥
shall be reincarnated over and over again as a pig.
पद्अर्थ: सूकर = सूअर
अर्थ: मनुष्य को मरने के वक्त यदि अपनी संतान की याद आए और वह यदि उन्हीं की याद में मर जाए तो उसकी अगली योनि सूअर की होगी।
ਪ੍ਰੇਤ ਜੋਨਿ ਵਲਿ ਵਲਿ ਅਉਤਰੈ ॥੪॥
pret jon val val autarai. ॥4॥
shall be reincarnated over and over again as a spirit/ghost.
अर्थ: मनुष्य को मरने के वक्त यदि अपना घर याद आए। और वह उसी की याद में मर जाएँ तो उसकी अगली योनि प्रेत आत्मा की होगी ।
ਬਦਤਿ ਤਿਲੋਚਨੁ ਤੇ ਨਰ ਮੁਕਤਾ ਪੀਤੰਬਰੁ ਵਾ ਕੇ ਰਿਦੈ ਬਸੈ ॥੫॥
badat tilochan te nar muktaa, peetambar vaa ke ridai basai. ॥5॥
पद्अर्थ: बदति = कहता है। मुकता = माया के बंधनों से आजाद। पीतंबरु = (पीत+अंबर) पीले कपड़ों वाला कृष्ण, परमात्मा। वा के = उस के।5।
अर्थ: त्रिलोचन कहता है: मनुष्य को मरने के वक्त यदि परमात्मा की याद आए और वह उन्ही की याद में मर जाएँ तो उसे मोक्ष की प्राप्ति होगी। वह जन्म मरण के बंधनों से सदा के लिए मुक्त हो जाएग क्योंकि उसके हृदय में परमात्मा खुद आ के बसें है
अजामिल की कहानी से हमें यही सबक मिलता है

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