नीच व्यक्ति

                             
                                  नीच व्यक्ति 

“घटिया और नीच इंसान की पहचान”

अपना पन बहुत दिखाता है।

कपटी और सिर्फ बातों की खाता है।

बातों में मिठास और दिल में जहर रखता है।

एक नम्बर का मतलबी और लालची होता है।

इज्जत देने पर सर पर चढ़ जाता है और सामने वाले को गिरा हुआ इंसान समझता है।

प्यार से बोलने पर कमजोर समझता है।

अपने स्वार्थ की खातिर अपनों को भी जान माल की हानि पहुंचा सकता है।

मदद करने पर मूर्ख समझता है और नेकियो का बदला घटिया व्यवहार से देता है।

विश्वास करने पर चोट पहुंचाता है।

क्षमा करने पर दूबारा आघात करता है।

रामचरित मानस में गोस्वामी तुलसीदास जी कहते हैं।

जेहि ते नीच बड़ाई पावा। सो प्रथमहिं हति ताहि नसावा॥ 

 अर्थात:
नीच मनुष्य जिसके उपकारों से बड़ाई पाता है वह सबसे पहले उसी को मारने का प्रयास करता है।

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