फौजी की आत्मा देती है सरहद पर पहरा
मृत्यु के पश्चात भी फौजी की आत्मा आन ड्यूटी जी हाँ आप जी ने सही पढ़ा एक फौजी के शहीद होने के बावजूद भी उसकी आत्मा कर रही है सिक्किम में भारत चीन बाॅडर पर अपनी ड्यूटी यह आत्मा ना सिर्फ सरहद पर पहरा देती है बल्कि दुश्मन की हर गतिविधि की खबर पहले हि सांकेतिक रूप में भारतीय सैना को पहुंचा देती है इतना हि नही सरहद पर भटके हुए नए भारतीय सैनिकों को रास्ता दिखाना हो या फिर ड्यूटी पर सौ रहे जवानों को थप्पड़ मार कर जगाना हो यह सब काम करती है 23 वें पंजाब रेजिमेंट के जवान सरदार हरभजन सिंह जी की पवित्र आत्मा। सैना एवं देश के प्रति उनकी निष्ठा भावना को देखते हुए भारतीय सैना ने उन्हें बाबा जी की पदवी दी है और सिक्किम में 14000 हजार फुट की ऊँचाई पर जेलेप ला और नाथू ला दर्रे के बीच उनके एक मंदिर का भी निर्माण किया है। यहां उनकी वर्दी बिस्तर फोटो एंव जूते रखे हुए है सैनिकों का मानना है कि हर रोज उनके बिस्तर पर सिलवटें तथा जूतों के नीचे मिट्टी लगी होती है जैसे कोई फौजी ड्यूटी करके आया हो। बाबा हरभजन सिंह जी का जन्म 30 अगस्त 1946 को गुजरांवाला (पाकिस्तान) में हुआ बँटवारे क...