Behlol dana aur badshah ka takht


         11. बोहलोल साहिब और बादशाह का तख्त




एक मरतबा बोहलोल साहिब का रूख़ हारून के दरबार की तरफ था। उन्होंने गंदे कपड़े पहन रखे थे। कंधे पर गुदड़ी थी और हाथ में छड़ी दरबान को मालूम था कि वह हारून के रिश्तेदार हैं इसलिये उसने उन्हें अन्दर जाने दिया। बोहलोल साहिब अपनी फटी हुई जूतियों को चटखाते हुए बड़ी तेजी से अन्दर दाखिल हुए। दीवाने ख़ास में पहुँचकर उन्होंने देखा की वज़ीरों की कुर्सीयाँ भी ख़ाली पड़ी हैं। शायद अभी दरबार चालू नही हुआ था। आप क़ीमती क़ालीन को रौंदते हुए बादशाह के तख्त पर जा बैठे और मज़े से उस पर बिराजमान हो गए। अभी आपको बैठे हुए चन्द लम्हे भी ना गुजरे थे कि दरबार के पहरेदार दौड़ते हुए आये और उन्होंने बोहलोल साहिब के दामन से पकड़ कर जोर से नीचे ख़ींचा और उन्हें तख्त से नीचे गिराकर दो तीन कोड़े भी रसीद कर दिए।
ओ दीवाने। तेरी यह जुर्रत के तूं बादशाह के तख्त पर बैठे।
हाय रे मर गया बोहलोल साहिब बुलन्द आवाज़ में तेजी से रोने लगे।
उसी वक़्त हारून बादशाह दीवाने ख़ास में दाखिल हुए। उन्होंने बोहलोल साहिब को इस तरह रोते चिल्लाते और फर्याद करते देखा तो हैरान रह गए।
यह सब क्या हो रहा है। हारून ने डाँट कर पुछा। आली जहा। यह दीवाना हुज़ूर के तख्त पर जा बैठा था और उतरने का नाम नहीं लेता था। इस लिए हमें थोड़ी सी सख़्ती करनी पड़ी। पहरे दारो ने डरते डरते बताया।
हारून ने रहमदिली से पूछा। बोहलोल इस तरह क्यों रो रहे हो। क्या तुम्हें बहुत तकलीफ़ पहुँची है।
हाँ। लेकिन मैं अपने लिए नहीं तुम्हारे लिए रो रहा हूँ बादशाह साहिब। बोहलोल साहिब ने जवाब दिया।
हारून ने ताज्जुब से पूछा वो क्यों भलां
बोहलोल साहिब ने जवाब दिया मैं तो तुम्हारे तख्त पर चन्द लम्हे ही बैठा था कि इतनी मार खाई के और तुम तो न जाने कब से इस तख्त पर बैठ रहे हो तुम्हारा क्या हाल होगा में तो इस लिए रो रहा हूँ  यह बात सुनकर हारून अंदर से काँप गया।


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