Behlol dana aur badshaha
21. बोहलोल साहिब और बादशाह
एक रोज़ हारून जंगल में शिकार खेलने निकला तो बोहलोल साहिब भी साथ हो लिए उसका मन तालाब में नहाने का हुआ। वह जैसे ही तालाब से नहाकर बाहर ही निकला उसने मज़ाक़ में कहा वाहब साहिब अगर में कोई ग़ुलाम होता तो मेरी क्या क़ीमत लगती।
बोहलोल साहिब ने भी बहुत मज़े से कहा। आलीजाह। सिर्फ पांच दीनार। यह सुन सभी हसने लगे।
सिर्फ पांच दीनार
इस बेइज्जती की हारून को उम्मीद नहीं थी। उसका मिजाज बिगड़ा और वह बोला हो न तुम दीवाने। इंसान की क़द्र व क़ीमत का तुम्हें अन्दाज़ा ही नहीं। अहमक़ जानते हो के यह जो मैंने जूतियां पहन रखी है। पांच दीनार तो सिर्फ़ इन्ही की कीमत है।
मेरे हुजूर मैने भी तो सिर्फ़ जूतियों की ही क़ीमत लगाई है।
वरना सरकार आप की तो कोई क़ीमत नहीं है। यह सुन फिर सभी लोग जोर जोर से हँसने लगे।
हारून का पारा चढ़ने लगा यह देख
बोहलोल साहिब ने जान बचाने के लिए मुस्कराते हुए कहा हुजूर आप तो अनमोल हैं।
हारून का पारा चढ़ने लगा यह देख
बोहलोल साहिब ने जान बचाने के लिए मुस्कराते हुए कहा हुजूर आप तो अनमोल हैं।

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