Behlol dana aur sahi aur galat ki pehchan
23.बोहलोल साहिब और गलत तथा सही काम की पहचान
एक बार बोहलोल साहिब अपनी ही मस्ती में गुम दरिया किनारे बैठे हुए थे कि एक मुरीद उनके पास आ पहुंचा और बोला ए दरवेश इंसान मुझे नसीहत
त कर कि में कैसे फरक करूँ कि कौनसा काम अच्छा है और कौन सा काम बुरा, कि कौन सा काम नेक है और कौन सा काम गलत।
बोहलोल साहिब ने झट से जवाब दिया और कहा ए अक्लमंद इंसान किसी भी काम को करते वक्त बस तूॅ सिर्फ इतना सोचा कर यदि इस काम को करते वक्त मेरी जान निकल जाए तो मुझे जन्नत नसीब होगी या मुझे जहन्नुम आग में जलना होगा। बस इस तरह तूं आसानी से अच्छे या बूरे काम में फरक कर सकता है ।

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