Behlol dana aur bakriyon ka batwara
18.बोहलोल साहिब और 5 बकरियों का बटवारा
बगदाद में एक बुजुर्ग व्यक्ति के पास 5 बकरियां थी उसके दो लड़के थे। जब उस बुजुर्ग के इंतकाल के बाद जब उसकी वसीयत पढ़ी गयी तो उसमें लिखा था कि
मेरे मरने के बाद मेरी 5 बकरियों में से आधी मेरे बड़े बेटे को तथा एक तिहाई मेरे छोटे बेटे को दे दी जाए। पर इस बात का ध्यान रखा जाए किसी भी बकरी को कोई नुकसान ना पहुंचे उन्हें किसी भी सूरत ए हाल में मारा ना जाए इन्हें जिंदा ही दोनों में तकस्मि किया जाए।
पूरे बगदाद की आवाम चक्कर में पड़ गई थी कि आखिर यह बँटवारा होगा कैसे क्योंकि
5 बकरिया में से आधी बड़े बेटे को मतलब कि 5/2 = 2.5 मतलब की एक बकरी को मारकर दो हिस्सों में बाटना पड़ेगा और दूसरी तरफ 5 का 1/3 = 1.6 छोटे बेटे को मतलब कि एक बकरी को फिर काटना पड़ेगा, फिर दुबारा एक बकरी को मारना पढ़ेगा। यदि दोनों भाई रजामंदि से एक बकरी काजी को भी दे देते हैं तो 4 क आधा=2 तथा 4 का 1/3 = 1.3 फिर एक बकरी को मारना पढ़ेगा।
सब बड़ी उलझन में थे। बगदाद के सारे काजी हार मान बैठे थे। तभी वहां बोहलोल साहिब अपनी दो बकरियों के साथ आ पहुंचे। उन्होंने पूरी बात को इत्मीनान से सुना और बोले यह तो बहुत ही आसान काम है इतना सुनते ही कुछ लोग तो जोर जोर से हसने लगे तभी काजी साहिब ने कहा बोहलोल साहिब क्या आप इनका मसला हल करना पसंद करेंगे। हां हां जरूर आप ऐसा करें काजी साहिब आप मेरी एक बकरी को इन 5 बकरियों में मिला कर इनमें बांट दो। काजी साहिब ने कहा एक तो मरने वाला पागल था, जो कि ऐसी वसीयत कर के चला गया, और अब ये दूसरा पागल आ गया है जो बोलता है कि इन 5 बकरियों में मेरी एक बकरी मिलाकर बाँट दो। इस पर दोनों भाइयों ने कहा आखिर आप को इनकी बात मान लेने में क्या हर्ज है। काजी ने ऐसा हि किया।
5+1= 6 बकरीयां
आधी बड़े बेटे की = 3
एक तिहाई छोटे बेटे की 6 का 1/3 = 2
बची एक बकरी वो तो बोहलोल साहिब की थी जिसे वह अपने साथ ले चलते हुए।

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