Behlol dana aur zindagi ki haqeeqat
19.बोहलोल साहिब और जिंदगी की हकीकत
एक बार हारून रशीद बहुत ही गमजदा हालात में अपने महल में बैठा था कि तभी अचानक बोहलोल साहिब की आमद हुई। हारून रशीद ने बोहलोल साहिब का स्वागत किया और उन्हें अपने पास बैठाया बातों ही बातों में हारून ने बोहलोल साहिब से पूछा जीवन की वास्तविक हकीकत क्या है। इस पर बोहलोल साहिब ने बड़ी संजिदगी से उसे एक वाक्या सुनाया
कि एक बार जंगल पार करते समय किसी शख्स के पीछे
शेर पड़ जाता है और वह शख्स अपनी जान बचाने के लिए भागता है तभी उसे सामने एक कुंआ नजर आता है वह उसमें टंगी रस्सी के सहारे कुंए में लटक जाता है पर जब वह नीचे देखता है तो उसे मालूम पड़ता है कि कुंए का पानी मरे हुए जानवरों की लाशो से जहरीलाा हो चुका है इतने में उसकी नजर कुंए में लगे शहद के छत्ते पर पड़ती है जिससे वह थोड़ा शहद उंगली से निकाल कर खाने लगता है तभी
उसे मधुमक्खियां एक दो जगह डंंक भी मारती हैं पर शहद के आन्नद में वह भूल जाता है कि मौत उसके सर पर खड़ी है और इतने में दो चूहे उस रस्सी को कुतरने लगते हैं जिसके सहारे वह शख्स लटका हुआ होता है। बस यही जिंदगी की वास्तविक हकीकत है यह कह बोहलोल साहिब वहां से जानेे लगते हैं तभी हारून बोहलोल साहिब को रोकतेे हुए कहते हैं क्या मतलब मुझे यह रमज की बात समझ नहीं आई जरा खुुलकर समझाए तब बोहलोल साहिब ने कहा गौर से सुन बादशाह
जंगल यह दुनिया है, शेर मौत है, कुआं कब्र है, शहद इस दुनिया के सभी भोग विलास सुखों का प्रतीक है,
मधुमक्खियों का डंक दुख संताप है, दो चूहे दिन और रात हैं जो धीरे धीरे हमारी सांसो की डोर (रस्सी) को कुतर रहे हैं।

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