Behlol dana aur beti ki paidaish par gam
4.बोहलोल साहिब और बेटी की पैदाइश का गम
उन ही दिनो एक नामी अमूक शख्स के यहाँ लड़की पैदा हुई। बोहलोल साहिब को जब पता चला के वह लड़की की पैदाइश पर खुश नहीं है। तो वह अपनी गुदड़ी कंधे पे डाले खुद ही उसके यहाँ पहुंच गए।
भाईजान मैंने सुना है के आप लड़की की पैदाइश पर बहुत दुखी है। खाते है न पीते है और किसी से बात भी नहीं करते।
क्या करूँ भाई दिल ही नहीं लगता।
वह ठन्डी साँस भर कर बोला। मुझे बेटे की बड़ी आरज़ू थी। मगर अफसोस के अल्लाह ताला ने मुझे लड़की दे दी।
कमाल है भाई आप इस पर राज़ी नहीं के अल्लाह ने आपको कितनी प्यारी फूल सी बेटी दी है अगर वह आपको मुझ जैसा पागल बेटा दे देता तो फिर क्या करते।
उस शख्स को बोहलोल साहिब कि इस बात पर हँसी आ गई। लेकिन वह इसकी तह में छिपे हुए सबक को जान गया और ख़ुदा का शुक्र करने लगा उसने अपना सोग तोड़ा और लोगों से गिला किया के वह उसके पास मुबारक बाद पेश करने के लिये क्यों नहीं आते।

Comments
Post a Comment