Behlol dana aur najumi
24.बोहलोल साहिब और नजूमी
एक बार हारून के दरबार में यूनान का बहुत ही प्रसिद्ध नजूमी तशरीफ लाया और बहुत ही जल्द इसन अपने ईलम के दम पर सबको प्रभावित कर लिया पूरे बगदाद में इसका नाम हो गया बगदाद के बड़े बड़े व्यापारी सुबह से कतार में लग इससे अपना मुस्तकबील जानने को बेकरार होने लगे।
एक रोज यह नजूमी रात के चौथे प्रहर में तड़के सितारों की गणना करते करते विराने में टूटे हुए एक पुराने कुंए में जा गिरा इत्तेफाक से बोहलोल साहिब वहीं खुदा की इबादत में मशगूल थे इसकी बचाओ बचाओ की आवाज सुन वह दोड़कर कुंए के पास पहुंचे और जैसे तैसे उन्होंने बड़ी मुश्किल से इसे बाहर निकाला इसने बोहलोल साहिब का बहुत शुक्रीया अदा किया और अपना तआरुफ़ कराते हुए कहा ए भले इंसान में यूनान का बहुत बड़ा नजूमी हूँ बड़े बड़े लोग मुझसे मिलने को बेकरार रहते हैं में बादशाह का खास महमान हूँ और कुछ दिनों के लिए महल में ठहरा हुआ हूँ मुझ से वहां जरूर मिलने आना में तुमको तुम्हारा मुस्तकबिल बताऊंगा वो भी एक दम मुफ्त अच्छा अब मुझे इजाजत दो में चलता हूँ लोग मुझसे मिलने आने वाले ही होंगे। इतना कह वह जब जानें लगा तो बोहलोल साहिब ने उसे पीछे से टोका साहिब जरा रूकिए मेरी बात सुनिए।
पहली बात तो यह कि हम फकीरों का क्या मुस्तकबिल है हमें अच्छी तरह से मालूम है और दूसरी बात यह कि जिसे खुद अपना मुस्तकबिल ना पता हो वह दूसरों का क्या मुस्तकबिल बताएगा।
क्या मतलब में समझा नहीं
अमा मियाँ रहने दो तुम्हें तो यह भी नहीं पता के तुम आज कुंए में गिरने वाले हो बात करते हो मुस्तकबिल बताने की लोगों को मूर्ख बनाने का यह अच्छा धंधा है।
यूनानी नजूमी दुबारा फिर कभी बगदाद में नजर नहीं आया।

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