Behlol dana aur ghatiya insaan


           3.बोहलोल साहिब और एक चालाक इंसान


 


एक बार आप दीवानगी के आलम में कहीं जा रहे थे तो एक चालाक शख़्स ने आपका मज़ाक उड़ाने की शरारत से कहा।
बोहलोल साहिब क्या तुमने कभी किसी पागल को देखा है।
मेरा बहुत जी चाहता है कि मैं किसी पागल से मिंलू
हजरत आपकी यह ख़्वाहिश तो बड़ी आसानी से पूरी हो सकती है। बोहलोल साहिब ने बड़ी ही सन्जीदगी से जवाब दिया।
वह किस तरह उस शख़्स ने पूछा।
आपके के घर में आईना तो होगा ही उसमें अपने हसीन चेहरे को देखिएगा। आपको की पागल की ज़ियारत हो जायेगी लोग हँसने लगे और वह घटिया शख्स इतना सा मूंह बनाकर रह गया।


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