Behlol dana aur dhokebaaz log
30.बोहलोल साहिब और धोखेबाज लोग
हारून के दरबार जब इस धौखेबाज की बात चल रही थी तो बोहलोल साहिब भी वहीं मौजूद थे। हारून की शक्ल देख कर उन्हें हँसी आ गई।
बोहलोल साहिब ने हँसी रोकते हुए बोले।
इस धोखे बाज़ सय्याह का क़िस्सा तो बिल्कुल एक बुढ़िया के मुर्गे और बिल्ले के क़िस्से से मिलता जुलता है।
बयान करो हारून ने बेकरारी से कहा।
हुजूर क़िस्सा कुछ यूँ है के एक मरतबा एक बिल्ली ने एक बुढ़िया का पालतू मुर्ग़े को झपट लिया। बुढ़िया उसके पीछे दुहाई देती दौड़ी। अरे-अरे। पकड़ो। इस चोट्टी बिल्ली को पकड़ो। ज़ालिम मेरा दो सेर का मुर्ग़ लेकर भागी जाती है। कोई मेरी मदद करो। कोई तो इस बिल्ली को पकड़ो। हाय मेरा नाज़ो से पाला मुर्ग़ा ले जा रही है। इत्तेफ़ाक़न एक एक कुत्ता यह सब तमाशा देख रहा था। वह उस बुढ़िया से बोला अम्मा तूं क्यों परेशान होती हो। में अभी बिल्ली को सबक सिखाता हूँ और वह यह कह बिल्ली पर लपका बिल्ली अपनी जान बचा मुर्गे को जमीन पर छोड़ छत पर चढ़ गई। कुत्ते ने उस मुर्गे को दबोचा और ले भागा और जाते जाते अम्मा को कह गया अम्मा तेरा मुर्गा दो सेर का नहीं पूरे तीन सेर का लगता है और बूढ़िया माथा पीटते रह गई।
जनाब आज के दौर में भी कुछ कुत्ते बिल्ले इसी तरह शरीफ लोगों को बकरी समझ उनका शिकार करते हैं।
भोले भाले लोग इनकी मीठी बातों में फसते चले जाते हैं पर इन भोले भाले लोगों को ठग कर भी ऐसे बईमानों का कुछ नहीं बनता वह भूखे ही मरते हैं और उनका मुंह इस यहां में तो काला होता ही है और वह आखरत में भी नहीं बख्शे जाते।
बोहलोल साहिब ने हँसी रोकते हुए बोले।
इस धोखे बाज़ सय्याह का क़िस्सा तो बिल्कुल एक बुढ़िया के मुर्गे और बिल्ले के क़िस्से से मिलता जुलता है।
बयान करो हारून ने बेकरारी से कहा।
हुजूर क़िस्सा कुछ यूँ है के एक मरतबा एक बिल्ली ने एक बुढ़िया का पालतू मुर्ग़े को झपट लिया। बुढ़िया उसके पीछे दुहाई देती दौड़ी। अरे-अरे। पकड़ो। इस चोट्टी बिल्ली को पकड़ो। ज़ालिम मेरा दो सेर का मुर्ग़ लेकर भागी जाती है। कोई मेरी मदद करो। कोई तो इस बिल्ली को पकड़ो। हाय मेरा नाज़ो से पाला मुर्ग़ा ले जा रही है। इत्तेफ़ाक़न एक एक कुत्ता यह सब तमाशा देख रहा था। वह उस बुढ़िया से बोला अम्मा तूं क्यों परेशान होती हो। में अभी बिल्ली को सबक सिखाता हूँ और वह यह कह बिल्ली पर लपका बिल्ली अपनी जान बचा मुर्गे को जमीन पर छोड़ छत पर चढ़ गई। कुत्ते ने उस मुर्गे को दबोचा और ले भागा और जाते जाते अम्मा को कह गया अम्मा तेरा मुर्गा दो सेर का नहीं पूरे तीन सेर का लगता है और बूढ़िया माथा पीटते रह गई।
जनाब आज के दौर में भी कुछ कुत्ते बिल्ले इसी तरह शरीफ लोगों को बकरी समझ उनका शिकार करते हैं।
भोले भाले लोग इनकी मीठी बातों में फसते चले जाते हैं पर इन भोले भाले लोगों को ठग कर भी ऐसे बईमानों का कुछ नहीं बनता वह भूखे ही मरते हैं और उनका मुंह इस यहां में तो काला होता ही है और वह आखरत में भी नहीं बख्शे जाते।

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